पारंपरिक मिथिला बगिया रेसिपी: चावल के आटे से बनी एक स्वादिष्ट व्यंजन
परिचय
मिथिलांचल की पारंपरिक भोजन संस्कृति जितनी सरल है, उतनी ही स्वादिष्ट भी। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक अत्यंत प्रसिद्ध व्यंजन है बगिया, जिसे कई जगहों पर पिठा भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से चावल के आटे से बनाया जाता है और इसके अंदर गुड़ या कुर्थी दाल (कहीं-कहीं आलू और कुछ और भी प्रयोग करता है) की स्टफिंग की जाती है।
बगिया विशेष रूप से बिहार के उत्तर (मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा आदि) और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में प्रचलित है। यह केवल एक भोजन नहीं, बल्कि परंपरा से जुड़ा हुआ व्यंजन है, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी प्राप्त है। विशेषकर ठंडे मौसम में आयोजित “पुसौथ” संस्कार के दौरान मैथिल ब्राह्मण परिवारों में इसे अनिवार्य रूप से बनाया जाता है।
ठंड के मौसम में गरम-गरम भाप में पकी बगिया अपने मीठे स्वाद और मुलायम बनावट के कारण बेहद प्रिय मानी जाती है। इसे दो तरीकों से बनाया जाता है — भाप में पकी हुई (स्टीम्ड) और तली हुई। यहां हम मुख्य रूप से भाप में पकी बगिया बनाने की विधि बता रहे हैं।
बगिया बनाने का विधि
इसे बनाने का कुछ इस प्रकार है। यहाँ इसके बारे में विस्तार से जानकारी और बनाने की विधि दी गई है:
सामग्री:
चावल का आटा – 4 कप
-
गुड़ – लगभग 500 ग्राम
-
पानी – आवश्यकतानुसार
-
(वैकल्पिक) कुर्थी दाल – बारीक पिसी हुई, नमक, धनिया पत्ता, स्टफिंग के लिए
विधि:
आटा गूंथना:
बगिया बनाना:
तलना:
थोड़ा जैसे आप आलू पूरी को सिखाते हैं वैसे ही काम आज पर इसे सके यह ऑप्शनल है.
परोसना:
बगिया कब खाया जाता है:
बगिया मुख्य रूप से ठंड के महीने (पूस–माघ) में बनाई और खाई जाती है। यह मौसम के अनुसार शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देने वाला व्यंजन माना जाता है।😊
इसके अलावा यह विशेष अवसरों पर भी बनती है, जैसे:
पारंपरिक मैथिल पर्व और आयोजन
सूचना

0 Comments