जितिया व्रत कथा वैशम्पायन कहलन्हि एक दिन कैलाशक अति रमणीय शिखरपर बैसि पार्वती शंकर जी सँ हे महेश्वर! हम जे सुन' चाहैत छि से आहा कहू । पार्वती …
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